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आबकारी विभाग एक बार फिर चर्चाओं में

अक्सर अपने कारनामो को लेकर चर्चाओ में रहने वाला आबकारी विभाग एक बार फिर चर्चाओ में है। ताजा मामला बिना टैक्स चुकाए हुए शराब देहरादून ट्रांस...


अक्सर अपने कारनामो को लेकर चर्चाओ में रहने वाला आबकारी विभाग एक बार फिर चर्चाओ में है। ताजा मामला बिना टैक्स चुकाए हुए शराब देहरादून ट्रांसपोर्ट नगर के पास सरकारी रजिस्टर्ड गोदाम से बरामद होने का हैं। दरअसल आबकारी विभाग ने 348 पेटी अवैध शराब बरामद पकड़ी हैं विभागीय सूत्रों की माने तो शराब माफिया और विभागीय कर्मचारियों की सांठगांठ के गड़बड़झाले से ही ये पूरा मामला जुड़ा हैं।


 यू तो आबकारी विभाग अवैध रूप से तस्करी की जाने वाली शराब को अक्सर पकड़ता हैं लेकिन ताजा मामला सरकारी रजिस्टर्ड गोदाम से विभागीय की
छापेमारी कर 348 पेटियां बरामद  करने के इस मामले में अब कई सवाल भी खड़े होने लगे हैं। बरामद की गई शराब बिना एंट्री किये गोदाम में रखी गई थी।  रजिस्टर्ड गोदाम में अवैध शराब की पेटियां मिलना कही न कही आबकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। और ऐसा विना विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत के हो नही सकता। लिहाजा मामला बेहद ही गंभीर हैं। इस पूरे मामले पर आबकारी आयुक्त सुशील कुमार ने सख्त लहजे में साफ-साफ दो टूक कहा कि....पकड़ी गई शराब जिस भी कंपनी की है उस पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही साथ ऐसा कैसे हुआ इससे जुड़े तमाम पहलुओं की भी गंभीरता से जांच कराई जायेगी। यही नही विभागीय कर्मचारियों की संलिप्ता पर  उन्होंने कहा कि जांच में इस प्रकरण की हकीकत उजागर हो जायेगी और जो भी दोषी होगा उस पर सख्त काईवाई की जाएगी।


 


आबकारी विभाग भले ही इस छापेमारी के बाद अपनी पीठ थपथपाने का काम कर रहा हो, लेकिन इस रेड के बाद एक बात तो पूरी तरह से साफ हो गई हैं कि आबकारी विभाग और शराब माफियाओ के गठजोड़ के चलते ही यह शराब गोदाम तक पहुँची थी। अब सबसे बड़ा बड़ा सवाल तो यह भी है कि इस तरह का शराब का काला कारोबार आखिर प्रदेश के किन- किन क्षेत्रो में कब से चल रहा हैं ? चिंता की बात तो यह हैं कि इस तरह की कृत्य से सरकार को लाखो के टैक्स चोरी कर राजस्व  का चूना लग रहा हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि आबकारी विभाग का जिम्मा संभाल रहे। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत विभाग की इस तरह की कार्यशैली से विभाग की फजीहत न हो इस पर आखिर क्या कार्रवाई करते है ?