समाज सेवी खेमचंद गुप्ता ने जताया मीडिया व प्रशासन का आभार

लॉक डाउन के चलते लगातार सामाजिक संघटन सामने आकर से वा कर रहे तो वही यदि बात करे बडोवाला के समाजसेवी खेम चंद गुप्ता की तो वो लगातार गरीबो की सेवा कर रहे है साथ ही उन्होंने मीडिया व प्रशासन का भी आभार व्यक्त किया उन्होंने कहा कि जिस तरह से मीडिया व प्रशासन लगातर सहयोग कर रहा है वो बड़ा ही सरहानीय है उन्होंने बताया कि  लाकड़ौन में सेवा करते हुए 31 दिनों में हमें मालूम ही नहीं चला 31 दिन कब चले गए समाज का मीडिया का प्रशासन का पूरा सहयोग मिल रहा है मैंने अपने सामाजिक जीवन के 43 वर्षों में ऐसा अनुभव कभी नहीं किया मैंने देखा है सेवा करने वाले कोई अपना वोट बैंक देख रहे हैं कोई जाति देख रहे हैं सेवा निस्वार्थ ऐसे व्यक्ति तक पहुंचने चाहिए इसका कोई नहीं है जो परदेसी है चाहे उसका कोई धर्म कोई जाती हो कोई पार्टी हो इस प्रकार पत्रकार प्रिंट मीडिया सेवा करते हैं इस प्रकार सेवा करनी चाहिए इस विपदा के समय में बड़ों वाला में चिंता रानी वाइफ ऑफ बच्चा राम बहुत गरीब दिव्यांग महिला थी जिसको की कच्चे राशन का किट हम समाज के सहयोग से देकर आए थे उसके पति का स्वर्गवास हो गया लेकिन जब मुझे मालूम चला हमने उसका बैंक में जनधन खाता खोला था उसके साल में ₹12 करते थे मैंने उसको कल बैंक में भेजा बैंक मैनेजर का मुझे फोन आया कि नगर निगम से उसका मृत्यु प्रमाण पत्र बना दो बैंक कोशिश करेगा मोदी का जो प्रयास था बैंक भी उसमें शामिल होकर उसको दो लाख दिया जाएगा वह इतनी गरीब है मकान में भी वर्षा का पानी घुसता है हमें कहती है मुझे ढकने को बैनर दे दो होल्डिंग दे दो उसी के बगल में एक महिला रहती है जिसके पति पुत्र की मृत्यु हो गई है उसकी एक लड़की है उसके घर की बिजली भी कट गई थी हमने समाज के कुछ लोगों के सहयोग से उसका बिजली का बिल जमा किया उसकी बिजली तो लग गई परंतु आज खाने के लाले पड़े थे हमने समाज के सहयोग से उसके यहां राशन का किट पहुंचाया हमें इस 31 दिन के विपदा के काल में लगभग 200 परिवार ऐसे मिले जोकि आज भी बहुत मुश्किल का जीवन जीते हैं बहुत के आज भी राशन कार्ड नहीं है जीने का सहारा ईश्वर मीडिया एवं समाज है  एक महिला इसके पति का स्वर्गवास हो गया है मंदिर में सेवा करती है उसका कच्चा मकान गिरने वाला है कई बार मकान हेतु हम शासन को पत्र भेज चुके हैं पिछली बार क्षेत्रीय विधायक एवं मुख्यमंत्री के यहां से उसको 2000 की आर्थिक सहायता मिली थी उसके घर भी हम भोजन का किड्स लेकर आए हैं परंतु चिंता है यदि देवीय आपदा हुई वह अपने क्षतिग्रस्त मकान में नष्ट ना हो जाए यह सब राजधानी के 15 किलोमीटर क्षेत्र में स्थित परिवार है एक परिवार जिसका बेटा जेल में बंद है मां भोजन के लिए भटक रही है एक महिला घरों में बर्तन धो कर अपना पालन करती थी उसका ब्लॉक डॉन में भोजन चिंता से रुक गया जब उसके घर हम किट लेकर गए उस विधवा की बेटी बड़ी खुशी से बाहर आई कि कोई हमारी मदद करने आया है ऐसे अनेक परिवार हैं क्योंकि नगर की घटनाएं तो सब पत्रकार लिखते हैं लेकिन गांव में क्या हो रहा है इसके लिए सरकार को भी ध्यान देना होगा