युवाओं की रचनात्मकता को खत्म कर रही है, सोशल मीडिया


वर्तमान दौर में हर उम्र के लोग सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। सोशल मीडिया के कुछ फायदे हैं तो नुकसान भी हैं। इसने एक तरफ ये दूर रह रहे लोगों को पास ले आया है, पर करीबियों को दूर कर दिया है। हाल ये हो गया है कि मां-बाप बच्चों तक से सोशल मीडिया के जरिए बात कर रहे हैं। युवाओं के पास समय नहीं है कि वे अपने मां बाप से भी कुछ क्षण बात तक करे या फिर कुछ समय निकालकर उनके साथ समय व्यतीत करें। बढ़ती दूरियां... 
सोशल मीडिया का उपयोग सभी को करना चाहिए पर इसकी समय सीमा जरूर तय करनी चाहिए। लोग अक्सर अपनी भावनाएं सोशल मीडिया पर व्यक्त करते हैं। लेकिन उस पर सिवाए टिण्पणी मिलने के अलावा कुछ नहीं होता। अगर आप परिवार और दोस्तों से अपनी भावनाएं सीधे साझा करेंगे तो आप बुरे दौर से जल्दी उबरेंगे। युवाओं को सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स का नशा सा हो गया है। सोशल वेबसाइट पर दिन में कई बार स्टेट्स अपडेट करना, घंटों तक दोस्तों के साथ चैटिंग करना जैसी आदतों ने युवा पीढ़ी को काफी हद तक प्रभावित किया है। घंटों तक फेसबुक, यूट्यूब, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, व ट्विटर , टिक टॉक जैसी सोशल मीडिया पर समय बिताने से न केवल उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है बल्कि धीरे-धीरे कुछ नया करने की रचनात्मकता भी खत्म हो रही है। 
सोशल नेटवर्किंग साइट्स के माध्यम से तमाम अश्लील सामग्री और भड़काऊ बातें भी लोगों तक प्रसारित की जा रही है, जोकि लोगों के दिमाग पर बुरा प्रभाव डालती है। इसकी वजह से देश में दंगा फसाद में वृदि हुई है। साथ साथ छोटी उम्र के युवा संगीन अपराध को बढ़ावा दे रहे हैं।सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने लोगों को वास्तविक जीवन को भूलाकर समेट कर रहने  को मजबूर कर दिया है। 
सोशल मीडिया के बढ़ते क्रेज से युवाओं में भारतीय संस्क्रति की कमी भी देखी जा रही हैं। युवाओं के रहन-सहन से लेकर परिवार के लिए आदर सम्मान सब कम होता जा रहा है। 
देश दुनिया में आए दिन कुछ न कुछ घटता रहता है और सोशल मीडिया के जरिए सभी जगह फैलता है। इसकी चपेट में युवा जल्दी आते हैं और उन्हें भटकाना-बहकाना आसान हो जाता है। और सोशल मीडिया द्वारा क्राइम रेट पर भी काफी वृद्धि हुई है।
तोहिष भट्ट
शिक्षक सांई इंस्टीट्यूट
 देहरादून।