राज्य में खस्ता हाल है स्वास्थ्य सेवाएं :- सूर्यकान्त धस्माना

राज्य की राजधानी के बीचों बीच देहराखास की एक प्रसूता नारी अगर सरकारी हस्पतालों के चक्कर काटते काटते इलाज के अभाव में दम तोड़ दे तो आप इससे पूरे राज्य के दूर दराज के इलाकों में ध्वस्त पड़ी स्वास्थ्य सेवाओं की कल्पना आसानी से कर सकते हो , यह कहना है उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना का। आज कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते हुए  धस्माना ने कहा कि उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाएं स्वयं आईसीयू में हैं , उन्होंने कहा कि विगत रोज एक महिला जिसके जुड़वा बच्चों की मौत हुई और तत्पश्चात उसको इलाज के लिए कोरोनेशन ,गांधी शताब्दी व दून में ले जाया गया जहां अन्तोगत्वा इलाज में लापरवाही की वजह से उज़की मृत्यु हो गयी पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर राज्यवासियों के सामने खींच देती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं रोजाना पूरे प्रदेश में घटित हो रही हैं लेकिन सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही।
श्री धस्माना ने कहा कि कांग्रेस राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से यह मांग करती है कि  राज्य में प्रचंड बहुमत की बीजेपी सरकार ने बीते तीन वर्षों में स्वास्थ्य सैक्टर में जो काम किया उसके बारे में श्वेत पत्र जारी कर प्रदेश की जनता को बताएं कि स्वास्थ्य सैक्टर में इंफ्रास्ट्रक्चर व डॉक्टर नर्सिंग स्टाफ आदि मानव संसाधन में कितना पैसा खर्च किये । श्री धस्माना ने कहा कि राज्य की राजधानी में ही जब स्वास्थ्य सेवाएं ढर्रे पर नहीं हैं तो दूर दराज व पहाड़ी क्षेत्रों के क्या हाल होगा इसकी कल्पना करना ही मुश्किल है। श्री धस्माना ने कहा कि कोरोना संकट ने पूरे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल कर रख दी। उन्होंने कहा कि राज्य के अधिकांश पर्वतीय जिलों के जिला हॉस्पिटलों में न्यूरो,कार्डियक,व ऑर्थो के सर्जन नहीं है । उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री स्वयं स्वास्थ्य मंत्री हैं किंतु कोरोना काल के लॉक डाउन से लॉक डाउन चार तक 70 दिनों में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत जी बजाय हस्पतालों व मैडीकल कालेजों में व्यवस्थाओं को दुरस्त करने के अपने सरकारी आवास पर ही होम क्वेरेन्टीन हो कर कैद रहे ।