जनपद में बन्द पड़े बेसिक स्कूल भवनों में आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित किये जाने के दिए दिशा निर्देश

, जिलाधिकारी सी रविशंकर की अध्यक्षता में जिलाधिकारी कैम्प कार्यालय में जनपद में बन्द पड़े बेसिक स्कूल भवनों में आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित किये जाने के सम्बन्ध में शिक्षा विभाग और बाल विकास के अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गयी। 


जिलाधिकारी ने बेसिक जिला शिक्षाधिकारी को निर्देश दिये कि जनपद में कम छात्र संख्या के कारण बन्द अथवा मर्ज किये गये कुल 70 विद्यालयों में 35 ऐसे विद्यालय जो सही दशा में हैं और जिनको बाल विकास विभाग को आंगनवाड़ी केन्द्रों के रूप में संचालन हेतु हस्तांतरित किया जाना है, उनको 26 जनवरी तक हस्तांतरित करने की कर्यवाही पूर्ण करें साथ ही उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास को भी निर्देश दिये कि इन 35 विद्यालयों में आंगनवाड़ी केन्द्रों का विधिवत् संचालन शुरू करें और शेष 35 ऐसे विद्यालय जहां कुछ में भवन क्षतिग्रस्त हैं अथवा आबादी से दूर हैं या पहले से ही वहां आंगवाड़ी केन्द्र बने हुए हैं, उनका एकबार परीक्षण करते हुए इस बात की आख्या दें कि जहां नये भवन निर्माण की जरूरत है अथवा क्षतिग्रस्त भवन की मरम्मंत कर उसमें आंगनवाड़ी केन्द्र संचालित हो सकता है इत्यादि के सम्बन्ध में प्रस्ताव देना सुनिश्चित करें। उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास को सीएसआर (कार्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) और एमएसआर(माई सोशल रेस्पोंसिबिलिटी) के माध्यम से शिक्षा विभाग, बाल विकास, समाज कल्याण, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग, इत्यादि द्वारा आदर्श विद्यालय, आंगनवाड़ी केन्द्र, मोरल पुलिस, स्टेशन इत्यादि के निर्माण और संचालन के लिए वित्तीय आपूर्ति हेतु एक संयुक्त पोर्टल बनाने के निर्देश दिये, जिससे आवश्यकतानुसार विभिन्न विभागों को महिलाओं, बच्चों, बजुर्गों, दिव्यांगजनों सहित सामान्यजन के लिए जरूरी सुविधाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। जिलाधिकारी ने गत वर्ष जनपद में विभिन्न स्थानों पर खनन निधि से श्रमिकों, निराश्रितों एवं गरीब-वंचित बच्चों के शिक्षा के लिए शुरू की गयी स्मार्ट कक्षाओं का फीडबैक प्राप्त करने हेतु मुख्य विकास अधिकारी को प्रत्येक विकासखण्ड के लिए एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति करते हुए इन स्मार्ट कक्षाओं का भौतिक निरीक्षण करवाते हुए आख्या प्राप्त करने के निर्देश दिये, ताकि तद्नुसार इस सम्बन्ध में कार्य किया जा सके। 
जिलाधिकारी ने जनपद के प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत् 40 हजार बच्चों को मिड्-डे-मिल के माध्यम से दिये जाने वाले भोजन में विविधत (वैराइटीज) का निर्धारण करते हुए सप्ताह में अलग-अलग प्रकार के पौष्टिक, स्थानीय स्तर पर सुलभ होने वाले तथा बच्चों द्वारा पसंद किये जाने वाले व्यंजन मेन्यु में शामिल करने के निर्देश बेसिक शिक्षाधिकारी को दिये। साथ ही इसी तरह का प्रयोग सभी आंगनवाड़ी केन्द्रों में भी करने के जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देश दिये। उन्होंने मंडुवा, जैसे स्थानीय जैविक उत्पादों के बिस्कुट तैयार करने के लिए विभिन्न कंपनियों से समन्वय करते हुए प्रत्येक बच्चे के खानपान पर आने वाले खर्च के हिसाब से विस्तृत प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिये।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी जी.एस रावत, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास डाॅ अखिलेश मिश्रा, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक राजेन्द्र रावत उपस्थित थे।