*ग्रामीणों ने टावर का इंस्टालेशन कैंसिल कराने के लिये   जिलाधिकारी को  दिया शिकायत पत्र

 


सहारनपुर/गागलहेड़ी/कैलाशपुर में पब्लिक ने विरोध शुरू कर दिया। पब्लिक का कहना है कि बिना जांच पड़ताल के घनी आबादी वाले एरिया में मोबाइल टावर लगाने की परमिशन दे देता है विभाग । कैलाशपुर नूर मस्जिद के पास लगाना चाहते है मोबाइल टावर जबकि जहाँ टावर की स्थापना करना चाहते है उस लोकेशन के आसपास घनी आबादी है जिससे रेडिएशन का असर बच्चों पर पड़ने का खतरा  है *पब्लिक का कहना है कि हम धरना-प्रदर्शन करेंगे और  टावर का इंस्टालेशन कैंसिल करा कर ही रहेंगे । इस सम्बंध में आज जिलाधिकारी व अन्य संबंधित अधिकारियों को भी ग्रामीणों ने  शिकायत पत्र दिया है*


मोबाइल टावर से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स कैंसर का कारण बनती हैं। इस रेडिएशन से जानवरों पर भी असर पड़ता है। यही वजह है कि जिस एरिया में मोबाइल टावरों की संख्या अधिक होती है, वहां पक्षियों की संख्या कम हो जाती है। ग्रामीण अंचल में इसी वजह से मधुमक्खियां समाप्त हो गई हैं।
*वही टावर स्पोट्र्स का कहना है कि टावर से बीमारी फैलने का खतरा नही है टावर लगने से मोबाइल नेटवर्क मजबूत होगा* 


लेकिन
*एक्सप‌र्ट्स की मानें तो मोबाइल टावर के 300 मीटर एरिया में सबसे ज्यादा रेडिएशन होता है। एंटेना के सामनेवाले हिस्से में सबसे ज्यादा तरंगें निकलती हैं। जाहिर है, सामने की ओर ही नुकसान भी ज्यादा होता है। मोबाइल टावर से होने वाले नुकसान में यह बात भी अहमियत रखती है कि घर टावर पर लगे ऐंटेना के सामने है या पीछे। टावर के एक मीटर के एरिया में 100 गुना ज्यादा रेडिएशन होता है। टावर पर जितने ज्यादा एंटेना लगे होंगे, रेडिएशन भी उतना ज्यादा होगा।*


 


रेडिएशन से ये होते हैं नुकसान
- थकान
- अनिद्रा
- डिप्रेशन
- ध्यान भंग
- चिड़चिड़ापन
- चक्कर आना
- याद्दाश्त कमजोर होना
- सिरदर्द
- दिल की धड़कन बढ़ता
- पाचन क्रिया पर असर
- कैंसर का खतरा बढ़ जाना
- ब्रेन ट्यूमर


*टावर लगाने के ये हैं नियम*



*- पांच मीटर से कम चौड़ी गलियों में टावर नहीं लगेगा।*


*- एक टावर पर लगे एंटीना के सामने 20 मीटर तक कोई घर नहीं होगा।*


*- टावर घनी आबादी से दूर होना चाहिए।*


*- जिस जगह पर टावर लगाया जाता है, वह प्लाट खाली होना चाहिए।*


*- उससे निकलने वाली रेडिएशन की रेंज कम होनी चाहिए।*
*- कम आबादी में जिस बिल्डिंग पर टावर लगाया जाता है, वह कम से कम पांच-छह मंजिला होनी चाहिए।*


*- टावर के लिए रखा गया जेनरेटर बंद बॉडी का होना चाहिए, जिससे कि शोर न हो।*
- जिस बिल्डिंग की छत पर टावर लगाया जाता है, वह कंडम नहीं होनी चाहिए।
- दो एंटीना वाले टावर के सामने घर की दूरी 35 और बारह एंटीना वाले की 75 मीटर जरूरी है।
- मोबाइल कंपनियों को अभी लगे टावरों से उत्सर्जित विकिरण को 90 फीसद तक कम करना होगा।


*- निर्देशों का उल्लंघन करने वाले पर 5 लाख रुपए प्रति टावर जुर्माना है।*


बोलते हैं आंकड़े
-2010 में डब्ल्यूएचओ की एक रिसर्च में खुलासा हुआ कि मोबाइल रेडिएशन से कैंसर होने का खतरा है।
-हंगरी में साइंटिस्टों ने पाया कि जो बहुत ज्यादा सेलफोन इस्तेमाल करते थे, उनके स्पर्म की संख्या कम हो गई।
-जर्मनी में हुई रिसर्च के मुताबिक जो लोग ट्रांसमिटर ऐंटेना के 400 मीटर के एरिया में रह रहे थे, उनमें कैंसर होने की आशंका तीन गुना बढ़ गई। 400 मीटर के एरिया में ट्रांसमिशन बाकी एरिया से 100 गुना ज्यादा होता है।
-केरल में की गई एक रिसर्च के अनुसार मोबाइल फोन टावरों से होनेवाले रेडिएशन से मधुमक्खियों की कमर्शियल पॉपुलेशन 60 फीसदी तक गिर गई है।