प्राइवेट स्कूलों के आगे उत्तराखंड सरकार मजबूर ------यु के डी

 कोरोना महामारी जो वैश्विक रूप धारण कर चुका है उसे रोकने के लिए धरती पर देवदूत का काम डॉक्टर, पुलिस व सफाई कर्मी बखूबी से निभा रहे हैं।लेकिन उत्तराखंड की राज्य सरकार से दल गुजारिश करता है कि देश के अन्य राज्यों में जो उत्तराखंडी भाई लॉकडावन में देश के अन्य राज्यों में फंसे है उनकी सुध लेते हुए उत्तराखंड में लाने की व्यवस्था की जाय।सरकार की गैरजिम्मेदाराना रवैया कि गुजरात के लोग उत्तराखंड से सरकारी बसों द्वारा भेजे गए लेकिन गुजरात मे फंसे लोगों को वाफिस लाने के लिये राज्य सरकार ने सकारात्मक कदम नही उठाया,वही आज बजी गुजरात,मध्यप्रदेश,राजस्थान आदि राज्यों में राज्य के लोग फंसे है,विशेषकर प्राइवेट सेक्टर में काम करने वालो के पास पैसो की अपनी व्यवस्था की खत्म हो चुकी है।राज्य के नवयुवक आज बहुत परेसान से सोशल मीडिया के माध्यम से गुहार कर रहे है लेकिन राज्य का मुखिया के कान में जूं तक नही रेंग रही है। राज्य सरकार अभिलम्ब बाहरी राज्यों में फंसे उत्तराखंडी भाइयों को लाने की व्यवस्था करे।प्राइवेट स्कूलों के आगे राज्य सरकार मजबूर दिखी है जहां ऐसे परिस्तिथियों में प्राइवेट स्कूलों को 3 माह की फीस नही लेनी चाहिए वही सरकार इन प्राइवेट स्कूल माफियाओं के साथ खड़ी है।आम आदमी जो रोजमर्रा में पैसे कमाता है उसकी रोजी रोटी ठप पड़ी है वह कैसे अपने बच्चों की फीस दे पायेगा।लेकिन सरकार का यह कहना कि एक एक माह की फीस ले न कि तीन माह की फीस न ले यह निर्णय लेना चाहिए था।लेकिन त्रिवेंद्र की निक्कमी सरकार द्वारा गरीब जनता की सुध की कोई चिंता नही है