महिला की मौत अब कार्यवाही



खबर देहरादून से है जंहा लगातार स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही समय समय पर सामने आती रहती है लेकिन जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग अपनी जिम्मेदारियों से आखिर दूर क्यों क्या होगा पूरा मामला दिखाते है इस रिपोर्ट में

उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं का आलम पहले से ही ठीक नहीं है लेकिन स्वास्थ्य विभाग सुधरने का नाम नहीं ले रहा है लिहाजा जब कोई बड़ी घटना घट जाती है तो फिर आला अधिकारियों को उतरना पड़ता है दरअसल में पिछले 3 जून को राजधानी देहरादून की एक गर्भवती महिला अस्पताल पहुंची थी जहां उसको इलाज नहीं दिया गया और उसे घर के लिए रवाना कर दिया गया हालांकि 9  जून को महिला ने घर पर 2 बच्चों को जन्म दे दिया जबकि दोनों बच्चों की जन्म होते ही मौत हो गई है

9 जून को महिला की भी मौत हो गई है जिसके बाद जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग और देहरादून के डीएम को मजिस्ट्रेट जांच के आदेश देने पड़े हालांकि देहरादून के सीएमओ डॉ बीसी रमोला ने भी 3 सदस्य टीम का गठन किया है साथ ही  देहरादून के सीएमओ ने कहा कि इस तरीके की घटनाएं नहीं घटनी चाहिए जिसे लेकर सीएमओ ने नाराजगी जाहिर की है साथ ही  सीएमओ ने 15 दिन में रिपोर्ट भी मांगी है  सीएमओ ने कहा रिपोर्ट में कोई भी दोषी पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई होगी



  अब सवाल यह है कि जिस तरीके से महिला को इलाज नहीं मिला और उसकी मौत हो गई है और अब देहरादून के डीएम से लेकर देहरादून के सीएमओ ने जांच के आदेश भी हैं लेकिन समय रहते यदि उसे महिला को अस्पताल में भर्ती किया जाता तो आज जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग और देहरादून के डीएम को मस्जिद से जांच नहीं करानी पड़ती ऐसे में बड़ा सवाल यह भी है कि सरकार लगातार स्वास्थ्य महकमे को बढ़ाओ देने की बात कर रही है लेकिन दूसरी तरफ अस्पतालों में मरीजों की गर्भवती महिलाओं की मौत पर अब सियासत भी होने लगी है ऐसे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जो खुद एक स्वास्थ्य विभाग के मंत्री भी हैं लिहाजा उनके होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की दिशा और दशा कुछ ठीक नहीं चल रही है बहराल देखना होगा स्वास्थ्य विभाग की दशा लचर ही रहेगी या फिर विभाग अस्पताल में आनेवाले मरीजों को सही इलाज दे पाऐगा